संज़िदा

हाँ थोड़ा संज़िदा हूँ,
यू हीं मुस्कुराने की कला आती नही मुझे ,
शायद इसीलिए धोखा खा जाता हूँ,
चेहरे पे चेहरा रखना आता नही ,
नकली बनकर हँसाना भी नही आता,
थोडा धीर हूँ और गंभीर भी,
शायाद यही गच्चा खा जाता हूँ,
सच में भरोशा करता हूँ ,
झूठ कभी बोलता नही ,
छल कपट मुझे आता नही ,
शायद ये कर पाता तो राहें आसान होती ,
लेकिन खुद को ये समझा ना सका,
और ना ही समझा पाऊँगा ,
गलत राह पकड़कर कभी आगे बढूँगा नही ,
जो हूँ.... वही रहूँगा बदलूँगा कभी नही ,
ज़िद्दी भी हूँ, जो सोचा उसे पाने की ज़िद भी है ,
लोग कहते है "परिश्रम सफलता की कुंजी है "
भरोशा है मुझे इस लाईन पर,
सही साबित करूँगा ,है भरोशा खुद में




आपका,
meranazriya.blogspot.com
meranazriyablogspotcom.wordpress.com

No comments:

Post a Comment

सब़र..

सब़र..  रख सब़र, हर मुश्किल छोड़ेगी अपना असर , बस मेहनत को बना अपना हुनर । ग़म ना कर, जारी रख अपना सफ़र , आज नहीं तो कल मिलेगी मंज़िल क...