आज बाल स्वरूप राम
मंद मंद मुस्कुरा रहे हैं
सब कुछ जान सब कुछ देख
खुब इठला रहे हैं
लोगों की भीड़ आंखों में
राम की मनोहर छवि को
संजो रहे हैं और,
दर्शन कर खुब अघा रहे हैं,
राम अंदर से सब देख रहे हैं
कि कैसे ये लोग हैं
दुनिया में कुछ और अंदर से कुछ
और ही गूल खिला रहे हैं,
पहले टेंट में,
अब विशाल भवन में
ला कर मुझको पटक दिया
पर ऐसा लगता है,
ह्दयतल से विरक्त कर दिया
मेरे ही रक्षक
भक्षक हो गये
ना सोचा एक बार भी
कितनों के विश्वास को
हिला दिया,
मेरी मुस्कान के पिछे
उस दर्द को कैसे दिखाऊँ
मेरे आंखों के सामने
सब लूट लिया,
सब ठीक नहीं है...
राजा को सब पता है,
उसकी एक हुंकार से
इन भरोसाचोर दुष्टों की
पुश्तों की दीवारें दऱक जाए
पर क्यों रूका है?
आशा ही नही भरोसा है
कुछ बड़े अनहोनी की तैयारी है
मर्यादा का पाठ सिखाने
की बारी है,
चाहे कितने बड़े बिल में घुसकर
छुपने की कोशिश कर ले
पाताल से ढुढ कर लाने की तैयारी है
और फिर से विश्वास जगाने की तैयारी है।
और फिर से जय श्री राम
उद्घोष का पताका लहराना है।
ये सब जानता हूँ,
इसलिए मंद मंद मुस्कुरा
रहे हैं।
जय श्री राम।।
आपका,
मेरा नज़रिया