ये आदत है मेरी...

ये आदत है मेरी... 

बहुत सोचता हूँ,
ये आदत है मेरी,
काम में जान लगाता हूँ,
ये आदत है मेरी।

पर नहीं बर्दाश्त करता,
जब कोई उँगली उठाता है,
चुप रहना मुश्किल होता है,
दिल सब कुछ कह जाता है।

बहुत कुछ कह जाता हूँ,
ये आदत है मेरी,
फिर खुद से ही लड़ता हूँ,
ये फितरत है मेरी।

फिर कोसता हूँ खुद को,
क्यों गुस्से पर काबू नहीं रख पाता हूँ,
कुछ पल के गुस्से में
क्यों अपनों को दुखी कर जाता हूँ।

फिर भी खुद को संभालता हूँ,
हर गलती से कुछ सीख जाता हूँ,
गिरकर फिर से उठता हूँ,
और पहले से बेहतर बन जाता हूँ।

काम हो या कोई जिम्मेदारी,
कहीं कोई कसर छोड़ता नहीं,
चाहे कितनी भी मुश्किल आए,
मैं पीछे कदम मोड़ता नहीं।

चाहे जो भी हो जाए,
हार मानने की आदत नहीं,
फेल न होने की चाहत है मेरी,
कुछ कर दिखाने की चाहत है मेरी।

चाहता हूँ खुद को बदलना,
इस ज़माने के साथ चलना,
पर इतना झूठ और फरेब
न कहने की, न सुनने की
आदत है मेरी।

सच कड़वा हो तो भी कहता हूँ,
गलत हो तो उसके खिलाफ रहता हूँ,
दुनिया चाहे जो समझे मुझे,
मैं अपने उसूलों के साथ रहता हूँ।

शायद कमियाँ हैं मुझमें,
शायद कुछ गलतियाँ भी हैं,
पर जो हूँ, वही दिखता हूँ,
दिल में कोई चालाकियाँ नहीं हैं।

बदलना चाहता हूँ खुद को,
पर अपनी पहचान खोना नहीं,
दुनिया के रंग में रंग जाऊँ,
इतना भी बदलना नहीं।

क्योंकि झूठ से समझौता न करने की
ईमानदारी है मेरी,
हर हाल में सच के साथ चलने की
आदत है मेरी।

आपका,
मेरा नज़रिया



खुद का दीदार..

खुद का दीदार

खुद का दीदार ना हुआ कई दिनों से,
खोया-खोया सा लगता है,
अब तो शीशे में चेहरा नहीं दिखाई देता,
कहाँ खो गया हूँ, समझ नहीं आता है।

अब पहले जैसी ना शाम होती है,
ना सुबह पहले जैसा लगता है,
ना जाने क्यों सब रूखा-रूखा सा लगता है,
सब बुझा-बुझा सा दिखता है।

कभी हँसता था बेवजह मैं,
अब मुस्कुराना भी मुश्किल लगता है,
कभी अपने ही ख्वाबों में जीता था,
अब हर ख्वाब अधूरा लगता है।

लोगों के बीच रहता हूँ फिर भी,
क्यों इतना अकेला लगता है,
सबको अपना हाल सुनाता हूँ,
पर खुद से ही कुछ छुपा-छुपा लगता है।

कभी सोचा था बहुत कुछ बनूँगा,
अब कुछ भी कहाँ अपना लगता है,
मंज़िल तो वही है सामने,
बस रास्ता कहीं खोया लगता है।

शायद थोड़ा थक गया हूँ मैं,
या वक़्त कुछ कहता लगता है,
शायद खुद को ढूँढने निकला हूँ,
इसीलिए खुद से दूर सा लगता है।

एक दिन फिर आईने के सामने,
खुद से मेरा सामना होगा,
चेहरे पर वही मुस्कान होगी,
और दिल फिर से अपना होगा।

बस थोड़ा सब्र रखना ऐ दिल,
ये वक़्त भी गुजर जाएगा,
जो खुद से आज बिछड़ गया है,
वो खुद से फिर मिल जाएगा।

— आपका, मेरा नज़रिया


सब़र..

सब़र.. 

रख सब़र,
हर मुश्किल छोड़ेगी अपना असर,
बस मेहनत को बना अपना हुनर।

ग़म ना कर, जारी रख अपना सफ़र,
आज नहीं तो कल मिलेगी मंज़िल की डगर।

शिकायत ना कर, ख़ुद पर रख नज़र,
तेरे कर्मों की एक दिन होगी क़दर।

शांत रह, हर बात का मत दे उत्तर,
वक़्त आने पर ख़ुद बोलेगा तेरा असर।

कष्ट को महसूस कर, मज़बूत कर जिगर,
हर ठोकर से निखार अपना हुनर।

लोग क्या कहेंगे—इसकी मत कर फ़िक्र,
अपने लक्ष्य पर रख पैनी नज़र।

आज संघर्ष है, तो कल होगा असर,
आज ख़ामोशी है, तो कल होगी क़दर।

हार मत मान, थक मत—जारी रख सफ़र,
क्योंकि जीत उसी की है, जिसमें है सब़र।

रख सब़र… रख यक़ीन…
कर कर्म… बढ़ता रह उम्रभर।
🔥


आपका, 

मेरा नज़रिया

कौन कहता है....

कौन कहता है...
गर शिद्दत से चाहो किसी को,
तो पूरी क़ायनात उससे मिलाने की साज़िश करती है...
नहीं...
कायनात रास्ते नहीं बनाती,
रास्ते हमें खुद बनाने पड़ते हैं।
हर कदम पर चुनौती होगी,
हर चुनौती पहाड़ सी होगी,
हर मोड़ पर इम्तिहान होगा,

और हर जीत की अपनी एक कीमत होगी।
उस पहाड़ को तोड़कर
रास्ता बनाना होगा,
हर चोट को सहना होगा,
हर गिरने के बाद
खुद को फिर उठाना होगा।

क्योंकि सफलता उन्हें नहीं मिलती
जो परिस्थितियों के बदलने का इंतज़ार करते हैं,
सफलता उन्हें मिलती है
जो परिस्थितियाँ बदलने का साहस रखते हैं।

कभी असफलता सामने होगी,
कभी आलोचना रास्ता रोकेगी,
कभी अपने ही सवाल करेंगे—
“क्या तुम कर पाओगे?”

और उस वक़्त
जवाब शब्दों से नहीं,
अपने कर्मों से देना होगा।

थकना मना नहीं है,
लेकिन रुकना विकल्प नहीं।
गिरना हार नहीं है,
गिरकर उठना ही असली जीत है।

अपने लक्ष्य को इतना बड़ा बनाओ
कि रास्ते की मुश्किलें छोटी लगने लगें।
अपने इरादों को इतना मज़बूत बनाओ
कि परिस्थितियाँ तुम्हारे सामने झुकने लगें।

याद रखो—
मंज़िल किस्मत से नहीं,
अनुशासन से मिलती है।
सपने सोचने से नहीं,
उन्हें हर दिन जीने से पूरे होते हैं।

इसलिए चलते रहो...
सीखते रहो...
खुद को बेहतर बनाते रहो...

क्योंकि एक दिन
यही संघर्ष तुम्हारी पहचान बनेगा,
यही मुश्किलें तुम्हारी ताकत बनेंगी,
और यही सफ़र दुनिया से कहेगा—
“वो इसलिए सफल नहीं हुआ
कि उसके रास्ते आसान थे,
वो सफल हुआ क्योंकि
उसने मुश्किल रास्तों पर भी
चलना कभी बंद नहीं किया।”


आपका, 
मेरा नज़रिया

सब याद रखा जायेगा...

🌸 “सब याद रखा जायेगा” 🌸

आज विदाई का ये पल है,
आँखों में थोड़ी नमी, दिल में गर्व अपार है,
आपसे सीखा हर एक सबक,
हम सबके लिए अनमोल उपहार है।

आपका नेतृत्व, आपका विश्वास,
हर मुश्किल में आपका साथ,
कठिन रास्तों को आसान बनाना,
और टीम को हमेशा आगे बढ़ाना—
सब याद रखा जायेगा।

आपकी सादगी, आपका व्यवहार,
हर किसी को देने वाला सम्मान,
काम के प्रति आपकी प्रतिबद्धता,
और निर्णयों में आपका आत्मविश्वास—
सब याद रखा जायेगा।

जब परिस्थितियाँ कठिन हुईं,
आपने रास्ता दिखाया,
जब टीम कभी थकने लगी,
आपने हौसला बढ़ाया।
आपका वो विश्वास और वो अंदाज़,
सब याद रखा जायेगा।

आपने सिर्फ लक्ष्य नहीं दिए,
बल्कि लक्ष्य तक पहुँचना सिखाया,
सिर्फ काम नहीं सिखाया,
बल्कि काम को बेहतर बनाना सिखाया।

आपकी सीख हमारे साथ रहेगी,
आपकी बातें हर कदम पर याद आएँगी,
आप जहाँ भी जाएँ, सफलता आपके साथ चले—
और यहाँ आपकी कमी
हर दिन महसूस होगी।

रिश्ते पद से नहीं,
व्यवहार और विश्वास से बनते हैं,
और आपने जो रिश्ते बनाए हैं,
वो समय के साथ और मजबूत होंगे।

आज हम आपको विदा जरूर कर रहे हैं,
लेकिन आपकी यादों को नहीं।
आपकी सीख, आपका मार्गदर्शन,
और आपके साथ बिताया हर पल—
सब याद रखा जायेगा।

नई मंज़िल, नई जिम्मेदारियाँ,
नई उपलब्धियाँ आपका इंतज़ार करें,
ईश्वर से यही हमारी शुभकामना है—
आप हमेशा स्वस्थ, प्रसन्न और सफल रहें।

विदाई सिर्फ एक पड़ाव है, अंत नहीं,
आपकी यात्रा अभी बाकी है।
जहाँ भी जाएँ, अपनी पहचान बनाते रहें,
और हमें हमेशा अपना समझते रहें।

आपके योगदान को हमारा सलाम,
आपके नेतृत्व को हमारा प्रणाम।
दिल से बस इतना कहना है—

आप यहाँ से दूर जरूर होंगे,
पर हमारी यादों से कभी दूर नहीं होंगे।
आपका साथ, आपकी सीख, आपकी मुस्कान—
हमेशा याद रहेगी…
और सच कहें तो,
“सब याद रखा जायेगा।”
🙏🌹


आपका, 

मेरा नज़रिया

अब फिर से 'जय श्री राम' उद्दघोष का पताका लहराना है...

अभी विगत दिनों से अयोध्या जी श्री राम मन्दिर ट्रस्ट के उपर चंदा चोरी के आरोप लग रहे हैं। निश्चित रूप में भगवान् राम के भक्तों में अपार रोष और अविश्वास का भाव है। ट्रस्ट से जुड़े हुए लोगों में ये बात पहले से ही पता होगी। जिन बुढी माताओं की आंखों में हमने खुशी के आंसू बहते हुए हम सबने प्रभु श्री राम के बाल स्वरूप मुर्ति स्थापना दिवस के दिन देखा था, आज वो ठगा हुआ महसूस कर रहीं हैं। भगवान् को तो बक्श देते , इन जाहिलों ने हद ही कर दिया। 

आज बाल स्वरूप राम 
मंद मंद मुस्कुरा रहे हैं
सब कुछ जान सब कुछ देख
खुब इठला रहे हैं
लोगों की भीड़ आंखों में
राम की मनोहर छवि को
संजो रहे हैं और, 
दर्शन कर खुब अघा रहे हैं, 
राम अंदर से सब देख रहे हैं
कि कैसे ये लोग हैं
दुनिया में कुछ और अंदर से कुछ
और ही गूल खिला रहे हैं, 
पहले टेंट में, 
अब विशाल भवन में
ला कर मुझको पटक दिया
पर ऐसा लगता है, 
ह्दयतल से विरक्त कर दिया
मेरे ही रक्षक 
भक्षक हो गये
ना सोचा एक बार भी
कितनों के  विश्वास को
हिला दिया, 
मेरी मुस्कान के पिछे
उस दर्द को कैसे दिखाऊँ
मेरे आंखों के सामने
सब लूट लिया, 
सब ठीक नहीं है...
राजा को सब पता है, 
उसकी एक हुंकार से
इन भरोसाचोर दुष्टों की
पुश्तों की दीवारें दऱक जाए
पर क्यों रूका है? 
आशा ही नही भरोसा है
कुछ बड़े अनहोनी की तैयारी है
मर्यादा का पाठ सिखाने
की बारी है, 
चाहे कितने बड़े बिल में घुसकर
छुपने की कोशिश कर ले
पाताल से ढुढ कर लाने की तैयारी है
और फिर से विश्वास जगाने की तैयारी है। 
और फिर से जय श्री राम
उद्घोष का पताका लहराना है। 
ये सब जानता हूँ, 
इसलिए मंद मंद मुस्कुरा
रहे हैं। 

जय श्री राम।। 


आपका, 
मेरा नज़रिया

अकाल मृत्यु : लखनऊ कोचिंग अग्निकांड

अकालमृत्यु : लखनऊ कोचिंग अग्निकांड 

हृदय विदारक, कलेजे को चिर देने वाली घटना, १५ मासूम बच्चों की दर्दनाक अकाल मौत, कैसे कहे, किससे शेयर करें मन बहुत उदास है, रोना आ रहा है। क्या गलती थी उन बच्चों की? पढ़ने ही तो गये थे। कुछ अच्छा करने की चाह, अपने माँ बाप को खुश करना चाहते होंगे। ये इन बच्चों की मौत नहीं, हत्या है। सिस्टम ने इन बच्चों की हत्या की है। और कितनी बार होगा। कुछ वर्ष पूर्व में ठीक ऐसा ही घटना जयपुर में हुआ था। बच्चों ने जैसे तैसे कूदकर जान बचाई थी। क्या सीख लिया सरकारों ने, हर घटना होने के बाद कार्यवाही की नौटंकी, हद है। कभी पेपर लीक, कभी परीक्षा केंद्र पर देरी, कभी  सीबीएसई का नया चेकिंग सिस्टम, सब बच्चों को ही सहना होगा। हद है। 

वो आखिरी काल
सिसकती हुई आवाज.. 
पापा मुझे बचा लिजीए
और सब खत्म
ना आवाज, ना सांसें
असहाय वो बच्ची 
आखिर कर भी क्या सकती
धुंआ और आग की लपटें
धीरे धीरे अपने आगोश में
इन मासूम बच्चों को लिल रहीं थीं
सिस्टम साला मुर्दा हैं
इन बच्चों का हत्यारा है
घटनाओं से सीख लेने का
सुध नहीं है
अब फिर जांच का जोश
दो चार दिनों की चर्चा और
फिर वही ढाक के तीन पात
हम भी दोषी है
कमियाँ दिखती है पर 
क्या करें मजबुरी है
कौन सुनेगा, किसको पड़ी है
इतने विभाग हैं, तंत्र हैं
चाहे तो सब कुछ हो सकता है
पर क्यों ?? 
वही 'चलता है'  एटीट्यूड
अब सब जगेगें, सब सही कर 
देने का दिखावा होगा
मीडिया इमोशनल टीआरपी के
लिए पूरी जान लगा देगी
पर कोई जवाबदेही ना होगी
सब धंधा हो गया है
पैसों की भूख ना जाने
कितनों की जान लेगी
व्यथित हूँ, मैं भी एक बाप हूँ
आंखे भर जा रही 
रिलेट कर रहा हूँ 
कोस रहा हूँ सिस्टम
आखिर कब तक ऐसे ही
बच्चों की जान से खिलवाड़ होगा
प्रदेश की सरकार से हमें 
और बहुतों को उम्मीदें है
हर प्रदेश में मुहीम चलाकर
ऐसे हालात दुबारा ना हो 
प्रयास करना होगा
मत खेलो यार बच्चों के जिंदगी से
कुछ करो, अच्छा करो। 
इन बच्चों का
देश और दुनिया के बहुत
बड़ा योगदान होगा। 
ये याद रखो। 

इस अग्निकांड में जिनके बच्चों की जान गयी है, ईश्वर उन्हें इस ह्दयविदारक कष्ट को सहने की शक्ति दे। इन सभी बच्चों को अश्रुपुरित श्रद्धांजलि। आपका सफर बस यही तक था। नि:शब्द हूँ। 


आपका, 
मेरा नज़रिया

ये आदत है मेरी...

ये आदत है मेरी...  बहुत सोचता हूँ, ये आदत है मेरी, काम में जान लगाता हूँ, ये आदत है मेरी। पर नहीं बर्दाश्त करता, जब कोई उँगली उठाता है...