हृदय विदारक, कलेजे को चिर देने वाली घटना, १५ मासूम बच्चों की दर्दनाक अकाल मौत, कैसे कहे, किससे शेयर करें मन बहुत उदास है, रोना आ रहा है। क्या गलती थी उन बच्चों की? पढ़ने ही तो गये थे। कुछ अच्छा करने की चाह, अपने माँ बाप को खुश करना चाहते होंगे। ये इन बच्चों की मौत नहीं, हत्या है। सिस्टम ने इन बच्चों की हत्या की है। और कितनी बार होगा। कुछ वर्ष पूर्व में ठीक ऐसा ही घटना जयपुर में हुआ था। बच्चों ने जैसे तैसे कूदकर जान बचाई थी। क्या सीख लिया सरकारों ने, हर घटना होने के बाद कार्यवाही की नौटंकी, हद है। कभी पेपर लीक, कभी परीक्षा केंद्र पर देरी, कभी सीबीएसई का नया चेकिंग सिस्टम, सब बच्चों को ही सहना होगा। हद है।
वो आखिरी काल
सिसकती हुई आवाज..
पापा मुझे बचा लिजीए
और सब खत्म
ना आवाज, ना सांसें
असहाय वो बच्ची
आखिर कर भी क्या सकती
धुंआ और आग की लपटें
धीरे धीरे अपने आगोश में
इन मासूम बच्चों को लिल रहीं थीं
सिस्टम साला मुर्दा हैं
इन बच्चों का हत्यारा है
घटनाओं से सीख लेने का
सुध नहीं है
अब फिर जांच का जोश
दो चार दिनों की चर्चा और
फिर वही ढाक के तीन पात
हम भी दोषी है
कमियाँ दिखती है पर
क्या करें मजबुरी है
कौन सुनेगा, किसको पड़ी है
इतने विभाग हैं, तंत्र हैं
चाहे तो सब कुछ हो सकता है
पर क्यों ??
वही 'चलता है' एटीट्यूड
अब सब जगेगें, सब सही कर
देने का दिखावा होगा
मीडिया इमोशनल टीआरपी के
लिए पूरी जान लगा देगी
पर कोई जवाबदेही ना होगी
सब धंधा हो गया है
पैसों की भूख ना जाने
कितनों की जान लेगी
व्यथित हूँ, मैं भी एक बाप हूँ
आंखे भर जा रही
रिलेट कर रहा हूँ
कोस रहा हूँ सिस्टम
आखिर कब तक ऐसे ही
बच्चों की जान से खिलवाड़ होगा
प्रदेश की सरकार से हमें
और बहुतों को उम्मीदें है
हर प्रदेश में मुहीम चलाकर
ऐसे हालात दुबारा ना हो
प्रयास करना होगा
मत खेलो यार बच्चों के जिंदगी से
कुछ करो, अच्छा करो।
इन बच्चों का
देश और दुनिया के बहुत
बड़ा योगदान होगा।
ये याद रखो।
इस अग्निकांड में जिनके बच्चों की जान गयी है, ईश्वर उन्हें इस ह्दयविदारक कष्ट को सहने की शक्ति दे। इन सभी बच्चों को अश्रुपुरित श्रद्धांजलि। आपका सफर बस यही तक था। नि:शब्द हूँ।
आपका,
मेरा नज़रिया