भावनाएं

हाँ अब थोड़ा डरने लगा हुं 
सहमने लगा हूं
अपनो के लिए 
सब कुछ कर ना पाने का भाव
डराने लगा है
ऐसा नहीं कि ये पहली बार है
पहले भी ऐसा महसूस होता था
अब थोड़ा ज्यादा संजीदा 
होने लगा हुं 
क्या समय रहते सब कर पाऊंगा
जिम्मेदारी निभा पाऊंगा
बार-बार पुछता हूं खुद से
बढती उम्र के साथ
अपनों के खोने का डर 
सताने लगा है
होना तो है एक दिन
जानता हूँ, फिर भी
ना जाने ये
नहीं चाहता हूं मैं
खुद से ज्यादा इनका
ख्याल रहने लगा है
ये खुश रहें, कुछ अच्छा करें
चाहता हूँ, 
अच्छे संस्कार हो 

आपका, 
मेरा नज़रीया


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