कौन कहता है...
गर शिद्दत से चाहो किसी को,
तो पूरी क़ायनात उससे मिलाने की साज़िश करती है...
नहीं...
कायनात रास्ते नहीं बनाती,
रास्ते हमें खुद बनाने पड़ते हैं।
हर कदम पर चुनौती होगी,
हर चुनौती पहाड़ सी होगी,
हर मोड़ पर इम्तिहान होगा,
और हर जीत की अपनी एक कीमत होगी।
उस पहाड़ को तोड़कर
रास्ता बनाना होगा,
हर चोट को सहना होगा,
हर गिरने के बाद
खुद को फिर उठाना होगा।
क्योंकि सफलता उन्हें नहीं मिलती
जो परिस्थितियों के बदलने का इंतज़ार करते हैं,
सफलता उन्हें मिलती है
जो परिस्थितियाँ बदलने का साहस रखते हैं।
कभी असफलता सामने होगी,
कभी आलोचना रास्ता रोकेगी,
कभी अपने ही सवाल करेंगे—
“क्या तुम कर पाओगे?”
और उस वक़्त
जवाब शब्दों से नहीं,
अपने कर्मों से देना होगा।
थकना मना नहीं है,
लेकिन रुकना विकल्प नहीं।
गिरना हार नहीं है,
गिरकर उठना ही असली जीत है।
अपने लक्ष्य को इतना बड़ा बनाओ
कि रास्ते की मुश्किलें छोटी लगने लगें।
अपने इरादों को इतना मज़बूत बनाओ
कि परिस्थितियाँ तुम्हारे सामने झुकने लगें।
याद रखो—
मंज़िल किस्मत से नहीं,
अनुशासन से मिलती है।
सपने सोचने से नहीं,
उन्हें हर दिन जीने से पूरे होते हैं।
इसलिए चलते रहो...
सीखते रहो...
खुद को बेहतर बनाते रहो...
क्योंकि एक दिन
यही संघर्ष तुम्हारी पहचान बनेगा,
यही मुश्किलें तुम्हारी ताकत बनेंगी,
और यही सफ़र दुनिया से कहेगा—
“वो इसलिए सफल नहीं हुआ
कि उसके रास्ते आसान थे,
वो सफल हुआ क्योंकि
उसने मुश्किल रास्तों पर भी
चलना कभी बंद नहीं किया।”
आपका,
मेरा नज़रिया
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